यह हैं ‘समृद्धी एमबीए सब्जी वाला

मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद आप क्या करना चाहेंगे, विदेश में नौकरी या देश के किसी बड़ी कंपनी में अच्छी तनख्वाह पर काम या फिर आप सब्जी बेचना पसंद करेंगे. सब्जी बेचने की बात सुनकर आप चौंक तो नहीं गये, लेकिन अहमदाबाद के दो मैनेजमेंट डिग्री धारक कौशलेन्द्र और निर्मल कुमार ने पढाई करने के बाद सब्जी बेचना बेहतर समझा. यह काम वे किसी मजबूरी में नहीं बल्कि पेशेवर तौर पर करते हैं और इससे वे लाखों करोड़ो कमा रहे हैं . कौशलेन्द्र ने अपनी कंपनी का नाम ‘समृद्धी एमबीए सब्जी वाला रखा है . आज उनके साथ काम करने वालों की संख्या 300 हो गयी है . इन्होंने अपनी कंपनी से लगभग 6000 से ज्यादा किसान परिवारों को जोड़ रखा है . इस काम में पहले दिन उनकी कमाई 22 रु थी . तकरीबन तीन साल के बाद उनकी कमाई पांच करोड़ रुपये हो गयी है . बिहार के रहने वाले कौशलेन्द्र ने पढ़ाई खत्म करने के बाद सब्जी बेचना और इसे एक चेन की तरह बना कर ताजा सब्जी लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया . अब इस व्यापार में उन्हें और अधिक संभावना नजर आ रही है . इसमें उनका साथ दे रहे हैं अहमदाबाद के रहने वाले निर्मल कुमार दोनों ने मिलकर धंधे में कई प्रयोग किये हैं जो सफल रहा है उनका कहना है कि वे किसानों को मुनाफे का ज्यादा हिस्सा देने का प्रयास कर रहे हैं . इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन वेंचर खोलने का फैसला किया है जिसकी सहायता से अहमदाबाद के लोग खेत से ही ताजी सब्जी ऑनलाइन खरीद सकेंगे . पटना में एक छोटी सी दुकान से शुरू हुआ यह सफर अब एक बड़ी कंपनी का रूप ले चुका है .
एक और राजा राममोहन राय का इंतजार
आजादी के 65 साल बाद और विधवाओं को जीने का मूलभूत अधिकार दिलाने वाले सती प्रथा उन्मूलन अधिनियम 1829 के 184 वर्ष गुजर जाने पर भी देश में विधवाओं की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है. हालत यह है कि देश के तमाम धार्मिक स्थलों के आश्रमों में भारी संख्या में ये विधवाएं जीवन बसर करने को मजबूर है. इनकी बदहाली को देख केन्द्र सरकार भी स्वयं सेवी संस्थाओं के जरिये विधवा आश्रमों का संचलन करा रही है. बावजूद इसके इनकी स्थिति में कोई गुणात्मक बदलाव नहीं दिखाई देता .  यही नहीं वृंदावन के आश्रमों में भजन गाने और सड़कों पर भीख मांगने वाली इन महिलाओं को आज एक और राजा राममोहन राय का इंतजार है. उच्चतम न्यायालय ने भी इनकी स्थिति को  संज्ञान में लिया है और 2012 में इनकी सामाजिक, आर्थिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक दल गठित किया . केंद्र सरकार ने भी हाल ही में राष्ट्रीय महिला आयोग को वृंदावन की विधवाओं की स्थिति का अध्ययन करने का निर्देश दिया है. स्वयंसेवी संस्थान गिल्ड ऑफ  सर्विसेज के सर्वेक्षण के मुताबिक वृंदावन में विधवाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, इनमें से कुछ तो घरवालों के दुत्कारे जाने के कारण यहां पहुंचीं, जबकि कुछ को दो वक्त की रोटी के लिए अपनों के आगे हाथ फैलाना पड़ा, तो वे इस जिल्लत से बचने के लिए वृंदावन पहुंच गईं . संस्थान की अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष डा. मोहिनी गिरि ने कहा कि एक तरफ  तो हम देश में महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं दूसरी तरफ  देश में विधवाओं की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है, उन्हें मौलिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. गैर सरकारी संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक वृंदावन की सड़कों पर 15 हजार से अधिक विधवाएं दयनीय स्थिति में जीने को मजबूर हैं. यहां के ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी बदतर है.

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